मानव इतिहास में तकनीक ने बार-बार हमारी क्षमताओं का विस्तार किया है। पहिए ने गति बढ़ाई। औज़ारों ने शक्ति बढ़ाई। दूरबीन ने दृष्टि का विस्तार किया। टेलीफोन ने आवाज़ को दूरी के पार पहुँचा दिया। इंटरनेट ने हमारी उपस्थिति को भौतिक स्थान से बहुत आगे तक फैला दिया। लेकिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ शायद कुछ […]
मनुष्य धीरे-धीरे भौतिक उपस्थिति से आगे किसी अधिक सूक्ष्म प्रकार की उपस्थिति की ओर बढ़ रहा है। यह परिवर्तन अचानक नहीं है। शायद इतना धीमा है कि हम उसे किसी एक क्षण में पहचान भी नहीं सकते। लेकिन यदि हम अपने दैनिक जीवन को ध्यान से देखें, तो उसके संकेत हर जगह दिखाई देते हैं। […]
डिजिटल संसार, शोर और एकांत पर एक चिंतन भीड़ को हम सामान्यतः एक भौतिक स्थिति के रूप में देखते हैं। किसी सड़क, बाज़ार, रेलवे स्टेशन या सार्वजनिक स्थान पर जब लोगों की संख्या बढ़ जाती है, तो वह जगह धीरे-धीरे भीड़भाड़ वाली लगने लगती है। रास्ते सीमित हो जाते हैं, आवाज़ें एक-दूसरे में मिलने लगती […]