मैं सोचता हूँ कि यदि मैं हर दिन अपने जीवन के बारे में कुछ लिखूँ, तो शुरुआत में शायद हर दिन अपने आप में महत्वपूर्ण लगेगा। आज क्या हुआ, मैंने क्या सोचा, क्या सीखा, किस बात ने मुझे परेशान किया, किस बात ने मुझे प्रसन्न किया—हर दिन का अपना एक आकार होगा।लेकिन यदि यही लिखना […]
मैं सोचता हूँ कि जिस तरह हम अपने जीवन को अलग-अलग दिनों में अनुभव करते हैं, शायद उसी तरह अस्तित्व स्वयं असंख्य चेतनाओं में अनुभव हो रहा हो।मेरे लिए आज का दिन अलग है, कल का दिन अलग था, और आने वाला दिन अलग होगा। जब मैं दिन के भीतर हूँ, तो वह अपने आप […]
भारत को शिव की भूमि कहना मेरे लिए केवल एक धार्मिक अभिव्यक्ति नहीं है। यह उस आस्था का स्वर है जिसमें इस भूमि के पर्वतों, नदियों, तीर्थों और जनजीवन में शिव की उपस्थिति अनुभव की जाती है। भक्त के लिए शिव यहाँ केवल पूजे नहीं जाते। वे यहाँ बसते हैं। इसी भाव से जब मैं […]
समय को हम सामान्यतः तीन हिस्सों में बाँटते हैं—भूत, वर्तमान और भविष्य। जो घट चुका है वह भूत है, जो घट रहा है वह वर्तमान है और जो अभी घटा नहीं है वह भविष्य। बाहरी संसार को समझने के लिए यह विभाजन पर्याप्त प्रतीत होता है। लेकिन जैसे ही हम समय को मनुष्य के आंतरिक […]