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शिव की भूमि और महाकाल का बोध

भारत को शिव की भूमि कहना मेरे लिए केवल एक धार्मिक अभिव्यक्ति नहीं है। यह उस आस्था का स्वर है जिसमें इस भूमि के पर्वतों, नदियों, तीर्थों और जनजीवन में शिव की उपस्थिति अनुभव की जाती है। भक्त के लिए शिव यहाँ केवल पूजे नहीं जाते। वे यहाँ बसते हैं। इसी भाव से जब मैं […]

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समय के भीतर मन: स्मृति, अनुभव और संभावना

समय को हम सामान्यतः तीन हिस्सों में बाँटते हैं—भूत, वर्तमान और भविष्य। जो घट चुका है वह भूत है, जो घट रहा है वह वर्तमान है और जो अभी घटा नहीं है वह भविष्य। बाहरी संसार को समझने के लिए यह विभाजन पर्याप्त प्रतीत होता है। लेकिन जैसे ही हम समय को मनुष्य के आंतरिक […]